अभ्यास मंडल के अशोक कोठारी ने बताया कि होलकर काल में सर पैट्रीगिडिज द्वारा बनाए गए मास्टर प्लान के आधार पर इंदौर को मेट्रापालिटन सिटी बनाना चाहिए। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष गौतम कोठारी के मुताबिक जैसे ही आगामी सरकार गठित होती है उनसे इंदौर को मेट्रोपालिटन अथारिटी के गठन की मांग की जाए। यदि चार से पांच साल देरी से अथारिटी का गठन होगा तब तक शहर का कबाड़ा हो जाएगा।

मौजूदा प्लान की कमियों को दूर कर बने सुनियोजित योजना
आर्किटेक्ट प्लानर श्रुति पुरोहित के मुताबिक शहर के नीले व हरे कारिडोर को जीवित रखने की जरुरत हैं। शहर के कई तालाबों की जमीन पर अतिक्रमण हो गया है। तालाबों का दायरा कम होता जा रहा है। शहर में जोनल प्लान तैयार किए जाना चाहिए। अर्बन प्लानर व प्रोफेसर रितु शर्मा मेेहरोत्रा के मुताबिक नागरिक सुविधाजनक मास्टर प्लान होना चाहिए।
मास्टर प्लान के साथ लोकल एरिया प्लान व रीजनल प्लान बनाया जाए। किसी क्षेत्र के क्या मुद्दे, इशू क्या है, उसके बारे में जानकारी ही नहीं है। आर्किटेक्ट व अर्बन प्लानर दीप्ति व्यास के मुताबिक मौजूदा मास्टर प्लान की जो कमियां है,उन्हें अगले प्लान में पूरा किया जाना चाहिए। 60 प्लानिंग एरिया जो अब हमारे पास अब आया है, उसका भी सुनियोजित प्लान बनाया जाए।
वाकेबल सिटी की अवधारणा को लागू होना पर्यावरण हित में होगा। पर्यावरणविद् पदमश्री भालू मोंढे ने कहा कि पहले शहर में 12 तालाब हुए करते थे,इनमें से सात तालाब खत्म हो गए है। अब जो तालाब बचे है उनका एक इंच क्षेत्र भी कम न हो। बजट में हरियाली के लिए खर्च की जाने वाली राशि का विशेष प्रविधान हो।
इंडस्ट्रियल टाउनशिप में उद्योगों संबंधित सारी सुविधाएं हो
कांफडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश गुप्ता के मुताबिक शहर में छावनी मंडी होने के कारण भारी वाहन आते है। इसके कारण प्रदूषण बढ़ता और नौलखा क्षेत्र में ट्रैफिक जाम होता है। इस मंडी को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना लंबे समय से बनाई जा रही है लेकिन अभी तक इसके लिए कोई जगह तय नहीं हुई।
नई लोहामंडी बनी लेकिन ट्रांसपोर्टर को शिफ्ट नहीं किया। ऐसे में मास्टर प्लान में व्यवसायिक गतिविधियों के लिए भी विशेष योजना बने। एआइएमपी के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद डफरिया के मुताबिक एक इंडस्ट्रलियल टाउनशिप के निर्माण की जरुरत है जहां लाजिस्टिक, ईटीपी, फायर ब्रिगेड, मजदूरों के लिए रहवास व अन्य औद्योगिक सुविधाएं एक ही जगह हो।
मास्टर प्लान निर्माण में वेदों में बताए सर्प द्ष्टि व गरुड़ द्ष्टि का रखना होगा ध्यान
पर्यावरणविद् एसएल गर्ग ने कहा कि शहर के मास्टर प्लान में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण के मुद्दों पर ध्यान देने की जरुरत है। हर पांच किलोमीटर के क्षेत्र में एक एकड़ का जंगल हो। हर जोन में एक कालेज व स्कूल हो। इंदौर को प्रापर जोन में बांटकर सुविधाएं विकसीत की जाए।
एसजीएसआइटीएस के पूर्व डायरेक्टर डा. पीके चांदे ने बताया कि शहर के आपदा प्रबंधन के लिए हमने योजना बनाई लेकिन उसे आज तक लागू नहीं किया गया। कलेक्टर या निगम इसे लागू करेगा यह अभी तक तय नहीं। तकनीकी का उपयोग कर योजना बनाई जाना चाहिए। इंदौर उत्थान समिति के सदस्य जगदीश छाबड़िया बोले कि नए मास्टर में सभी विभागों से समन्वय कर जमीनों का उपयोग तय व फ्रीज किया जाए।
शिक्षाविद डा. रेवा चौहान ने कहा कि ड्रोन तकनीक जैसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश का उपयोग मास्टर प्लान बनाने में हो। आर्किटेक्ट अमित सेठी बोले कि इंदौर की स्थिति ऐसी है कि लड़का 12 वी में 90 प्रतिशत अंक ले आया है और अब उसे समझ में नहीं आ रहा है कि आगे उसे क्या करना है। शहर में दो फार्मा इंडस्ट्री खुलती है तो इसे फार्मा सिटी बनाने की बात की जाती है।
चार आइटी उघोग खुलते है तो इसे आइटी सिटी बनाने की बात कही जाती है। वेदों में बताए गए सर्प द्ष्टि को ध्यान में रख मास्टर प्लान बनाने के लिए आसपास के क्षेत्र की संवेदनाओं को ध्यान में रखकर लोकल एरिया व जोनल प्लान बनाना होगा। वही इसके निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश का उपयोग कर गरुड़ द्ष्टि भी रखना होगा।
चर्चा में शामिल हुए गणमान्य इन सदस्यों ने भी दिए सुझाव
निजी महाविद्यालय प्राचार्य संघ के अध्यक्ष राजीव झालानी,एडवोकेट संजय मेहरा, जैन इंजीनियर्स सोसायटी के राजेश जैन व विकास जैन, खंडेलवाल समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुरली खंडेलवाल, आर्किटेक्ट प्लानर प्रकृति सेठी, रिटायर चीफ इंजीनियर महेश राजवैद्य, सेवानिवृत पोस्ट मास्टर जनरल एस के पाल, इंदौर उत्थान समिति के वी के गुप्ता, मालवा चेम्बर की महिला विंग की अध्यक्ष भातरी मंडोले, आहार व पोषण विशेषज्ञ आरती मेहरा, कवि विश्वनाथ कदम, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व विज्ञानी डा. दिलीप वागेला, मालवा चेम्बर कार्मस के यशवर्धन सिंह,अभिभाषक सुनील माकोड़े।
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