इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर किसान बोले- मर जाएंगे पर कौड़ियों के दाम नहीं देंगे पुरखों की जमीन.
इंदौर-बुधनी रेल लाइन पर किसान बोले- मर जाएंगे पर कौड़ियों के दाम नहीं देंगे पुरखों की जमीन.
देवास जिले में रेल लाइन की वजह से प्रभावित हो रहे किसानों का प्रदर्शन, रेलवे के नोटिस भी जला रहे।
- इंदौर-बुधनी रेल लाइन का काम विगत सात वर्षों से चल रहा है।
- सालों में जमीनों की कीमत 20 से 25 गुना तक बढ़ गई है।
- किसानों ने रेलवे द्वारा दिए गए नोटिसों की होली जलाई।
पूर्व जनपद सदस्य एवं किसान नेता हंसराज मंडलोई ने बताया कि पूर्व घोषणा के अनुसार इंदौर-बुधनी रेलवे लाइन के प्रभावित किसान इकट्ठा हुए एवं आक्रोश व्यक्त करते हुए रेलवे द्वारा दिए गए नोटिसों की होली जलाई। इंदौर-बुधनी रेल लाइन का काम विगत सात वर्षों से चल रहा है।
उसी समय हमने सरकार एवं रेलवे के अधिकारियों से निवेदन किया था कि पहले किसानों को जमीन का मुआवजा दिया जाए, इसके बाद दूसरे कार्य करते रहना। सरकार ने हमारी एक भी नहीं सुनी एवं केंद्र सरकार ने जो बजट दिया था वह पुल-पुलियाओं एवं अन्य कार्यों में खर्च कर दिया।
सात सालों में सरकार ने जमीन की गाइडलाइन तो नहीं बढ़ाई, उल्टे जो गाइडलाइन सात वर्ष पहले थी उसमें भी 20 प्रतिशत की कटौती कर दी। वर्षों पुरानी गाइडलाइन के हिसाब से किसानों को मुआवजा लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि इतने सालों में जमीनों की कीमत 20 से 25 गुना तक बढ़ गई है।
मांग मानेंगे तब देंगे जमीन
मध्य प्रदेश में किसानों का कहना है कि हम अपनी जमीन रेलवे को तब तक नहीं देंगे, जब तक हमें वर्तमान बाजार मूल्य से चार गुना ज्यादा मुआवजा नहीं मिलता। प्रभावित किसानों के परिवारों के शिक्षित युवाओं को योग्यता के हिसाब से नौकरी देने की मांग भी है। जनप्रतिनिधि भी चुनाव के समय हाथ जोड़कर वोट मांग रहे थे, लेकिन अब कोई किसानों के साथ नहीं खड़ा दिख रहा।
किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगों का निराकरण नहीं होने तक हम रेलवे को एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। मंडलोई ने बताया कि अलग-अलग गांवों में इस संबंध में दौरा कर रहे हैं। 10 दिसंबर को ग्राम करनावद, भमोरी, तोशी, चापड़ा, बेड़ामऊ, मोखा पिपलिया, कमलापुर, खेड़ाखाल, धन तालाब घाट जाएंगे।