गेहूं की कीमतों में उछाल पर सख्त हुई सरकार, जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक रखने की लिमिट में की कटौती.
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गेहूं की कीमतों में उछाल पर सख्त हुई सरकार, जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक रखने की लिमिट में की कटौती.
लोकसभा चुनावों से पहले गेहूं की कीमतों में उछाल के बाद उसे थामने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट की समीक्षा करने का फैसला किया है.
Wheat Price Hike: देश में गेहूं और आटे की बढ़ती कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही है. ऐसे में सरकार ने गेहूं को लेकर फिर से बड़ा फैसला लिया है. केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों के ट्रेडर्स, होलसेलर्स, रिटेलर्स, बिग चेन रिटेलर्स और प्रोसेसर्स के लिए गेहूं के स्टॉक लिमिट की समीक्षा करते हुए उसमें कटौती करने का फैसला किया है. ट्रेडर्स होलसेलर्स के लिए गेहूं की स्टॉक लिमिट को घटाकर 2000 टन से घटाकर 1000 टन करने का फैसला किया है. सरकार ने ये फैसला गेहूं की जमाखोरी और होर्डिंग रोकने के लिए लिया है जिससे बाजार में गेहूं की उपलब्धता बढ़ाई जा सके.
उपभोक्ता मामलों और खाद्य आपूर्ति एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी कर ये जानकारी देते हुए बताया कि गेहूं की कीमतों में कमी लाने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट की समीक्षा करते हुए ट्रेडर्स और होलसेलर्स के लिए स्टॉक लिमिट को 3000 टन से घटाकर 2000 टन, रिटेलर्स के लिए 10 टन से घटाकर 5 टन, बिग चेन रिटेलर्स के लिए ऑउटलेट के लिए 10 टन से घटाकर 5 टन और डिपो के लिए 2000 टन से घटाकर 1000 टन करने का फैसला लिया है.
सरकार ने बताया कि गेहूं स्टॉक करने वाली इकाईयों को गेहूं स्टॉक लिमिट पोर्टल (https://evegoils.nic.in/wsp/login) पर रजिस्टर करना जरुरी है साथ ही हर शुक्रवार को उन्हें स्टॉक की जानकारी पोर्टल पर देनी होगी. ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ आवश्यकता वस्तु अधिनियन के तहत कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने कहा कि जिन ट्रेडर्स व्यापारियों के पास तय स्टॉक लिमिट से ज्यादा स्टॉक मौजूद है उन्हें 30 दिनों के भीतर तय लिमिट के भीतर स्टॉक को लाना होगा. देश में गेहूं की आर्टिफियल कमी पैदा ना हो इसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार स्टॉक लिमिट की मॉनिटरिंग करती रहेंगी.
सरकार ने खुले बाजार में गेहूं की सप्लाई बढ़ाने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है. एफसीआई की ओर हर हफ्ते के लिए ई-ऑक्शन के जरिए ऑफर किए जाने वाले गेहूं की मात्रा को 3 लाख टन से बढ़ाकर 4 लाख टन करने का फैसला लिया गया जो फौरी तौर पर लागू हो गया है. एफसीआई नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को आटे की प्रोसेसिंग के लिए गेहूं उपलब्ध करा रही है जिससे 27.50 रुपये किलो के दाम पर भारत आटा ब्रांड के नाम से सस्ता आटा बेचने के लिए उपलब्ध करा रही है. सरकार ने कहा कि वो गेहूं के दाम और उसकी उपलब्धता को बनाए रखने के लिए कड़ी नजर बनाए हुए है.
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