अम्बाझर मनकामेश्वर महादेव शिवालय जहां अंग्रेज भी अपना सिर श्रद्धा के साथ झुकते थे!

अम्बाझर मनकामेश्वर महादेव शिवालय जहां अंग्रेज भी अपना सिर श्रद्धा के साथ झुकते थे!

इंदौर : महू क्षेत्र के गांव भगोरा के समीप स्थित है अम्बाझर मनकामेश्वर महादेव शिवालय जँहा अंग्रेज अधिकारी कर्मचारी स्थानीय रहवासीयों के साथ श्रद्धा से नमस्तक हो भजन पूजन किया करते थे! जब वर्ष 1863 में रेलवे ने महाराजा तुकोजीराव होल्कर द्वितीय ने ब्रिटिश अधिकारी ए. एस.आर्टन के साथ होल्कर रेलवे की नीव रखी जब इंदौर से खंडवा तक नैरो गेज रेलवे लाईन (पटरी) बिछाने के मार्ग का अवलोकन किया गया जब विविध सामग्री आपूर्ति के लिये खेड़िघाट इंदौर के मध्य घने जंगलों के बिच स्थित स्थानों में कालाकुण्ड, गुंजारा व उपरोक्त स्थान अम्बाझर (पातालपानी) को चुना गया! इन कठिन जानलेवा इलाकों मे जीवन की कल्पना उस वक्त करना आसान नहीं था, जंगली खुंकार जानवरों के साथ जंगली आदिवासीयों का खौफ बना रहता था! भोजन पानी के लिये तरसना पड़ता था, बारिश में तो झरने के पानी से काम हो जाता था, किंतु ग्रीष्म ऋतू जानलेवा साबित होती थी, पानी तो बहता था जानलेवा बीमारियों को उत्पन्न करने वाले बेकटेरियाओं के साथ, जिससे श्रमिक तो अपनी प्यास बुझा लेते थे लेक़िन अंग्रेजी बाशिंदे नहीं! खंडवा से वर्ष 1869 को महाराजा तुकोजीराव होल्कर द्वितीय के अनुदान एक करोड़ मय साढ़ेचार प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर 101 वर्षों के मयादी समय के लिये लेकर कार्य को प्रारम्भ किया गया, खंडवा से सरकतें सरकतें खेड़िघाट तक रेल पटरी वर्ष 1871 तक पहुंची इसके बाद जंगलो को चिरते, घाटों को काटते 1875 को पातालपानी रेलवेस्टेशन व तत्पश्चात 1877 को रेलवे लाइन इंदौर पहुंची, जँहा महाराज के साथ अंग्रेजी अफसरों ने होल्कर रेलवे का भव्य स्वागत किया!
इसी बिच पातालपानी स्टेशन को सहारा देने वाला ऊचाईयों की गहराइयों में स्थति अस्थाई रेलवे केम्प (अम्बाझर) अपनी सभी सेवाएं दें अपने फ़र्जओं की कसौटी पर खरा उतरा था! वर्षों से अंग्रेजी अफसरों के साथ स्थानीय निवासीयों को एक ब्रम्चारी बालक गुफ़ा की कंन्द्राओं में अपनी भक्ति में लीन तपस्या करता दिखाई पड़ता था, जो इस घने जंगलो में हष्ट पुष्ट बेफिक्र हो अपनी प्रभु भक्ति में डूबा रहता था, जब कोई वंहा उसका हालचाल लेने जाता तो आशीष के साथ स्वादिस्ट फल व मिष्ठान को पाकर आश्रयचकित हो जाता की यंहा इतने घने जंगलों में यह सामग्री कँहा से लाता होगा यह बालसन्त! एक बार वर्ष 1905-1906 के दरमियान रेलवे केम्प में किसी अंग्रेज को किसी जानवर या जंगलिझाड़ियों से जहर चढ़ गया, जिसका निराकरण करने के लिये उसी बालसन्त को बुलाया गया, जिसने मात्र स्पर्श से ही उस जहर को उतार कर उस अंग्रेज को निरोगी कर दिया! जब यह ख़बर आसपास के रहवासियों के साथ बड़े अंग्रेजी अफसर को लगी तो उन्होंने उस बालसन्त को उसी अस्थाई रेलवे केम्प में बुला आदर सत्कार कर सम्मनित किया! अंग्रेज अफसर ने अपनी सबसे बड़ी स्थाई समस्या पिने के पानी की उस संत को बताई तो बालसन्त ने इशारा कर सामने स्थित झाड़ियों को हटाने का इशारा किया, जैसे ही झाड़ फुस को हटाया गया तो सबने पाया की वंहा मीठे पानी का जल स्त्रोत है, साथ ही शिवपिंड भी दिखाई पढ़ रहा, सब की आस्था ओर प्रगड़ हो गई क्यूंकि वर्षों से वह इस स्थान पर कार्य कर रहे थे, जो इस स्त्रोत व शिवपिंड से अनभिज्ञ थे, सभी उस बालसन्त के सामने आदर के साथ चरणों में झूंक गए व उनका परिचय माँगा! जब बालसन्त बताते है की मेरा नाम लक्ष्मन गिरी महाराज है, मेरी उम्र नौ वर्ष है, में कई वर्षों से नीचे मेरे स्थान पर तपस्या करता आया हूँ! अब आप सब निश्चित होकर रहे, में सभी का कल्याण करूँगा! भक्तों द्वारा बलदेकर पूछने पर भी आपने यह न बताया की आप आएं कँहा से है! इसके बाद बड़े अंग्रेजी अफसर ने अपने अधीनस्थ अधिकारी को आज्ञा दी की इन संत लक्ष्मन गिरी महाराज को यंही स्थान पर कुटी निर्माण कर, इनका निवास स्थान बना दिया जाए, रेलवे केम्प के सभी कार्य पूर्ण हो गए है रेल सेवा सुचारु रूप से कार्य कर रही है, कुछ लोग नीचे पातालपानी स्टेशन पर रहेंगे जो नियमित इस बाल संत की सेवा में भी अपना योगदान देंगें! बाकी सब महू स्टेशन पर अपनी सेवा देंगें! इसके बाद पास के ग्राम भगोरा से रमेशचंद्र सोमानी, बद्रीलाल मुकाती, कांतिलाल जोशी, करण सिंह दरबार, जानकीनाथ पटेल व अन्य नियमित बालसन्त लक्ष्मन गिरी महाराज की सेवा भक्ति करने लगे! कुटिया के साथ धुने को प्रजवलित कर शिवपिंड का भजन पूजन आरम्भ हुआ जो आज लगभग सवा सौ साल बाद भी जारी है! यह स्थान विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के मध्य वह स्थान है जो चारों ओर से प्रकृति जंगलों से घिरा रमणीय धर्म जाग्रत करने वाला, सभी को आशीर्वाद के साथ आनंद प्रदान करने वाला स्थान है, जँहा आज शिवरात्रि का भजन पूजन कर 26 वॉ अनकूट (भंडारा) संपन्न होगा!

द्वितीय भाग में इस पूजनीय स्थान की ओर भी रोचक जानकारी आपके साथ हम साझा करेंगे, तो बने रहे "विस्तार समाचार" के साथ!

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