न्याय की राह तक एक ओर एम.ओ.जी. लाइन्स सैनिक शहीद हुआ.
इंदौर : न्याय की गुहार लगाते लगाते, उसके फैसले की राह तकते, एक ओर सैनिक शहीद हुआ! हम बात कर रहे है उस न्याय की जो एक आम आदमी को सुरक्षा दे उसके मूल भौतिक सुविधाओं की रक्षा करें! उसकी रोटी, कपड़ा ओर मकान जैसी आम सुविधाओं से वंचित न कर उसके स्वयं हितों की व्यवस्था करें! बड़ी निराशा व पीड़ा होती है, जब हम किसी सैनिक परिवार को टूटता बिखरता देखतें है!
आय.एम.सी. (इंदौर मुंसिपल कारपोरेशन) स्वयं हित व झूठे सम्मान के लिये केंद्रीय योजना स्मार्टसिटी हाईराइज बिल्डिंग को गलतसलत भ्रामक जानकारीयों के माध्यम से वर्षों पुरानी ऐतिहासिक भूमि एम.ओ.जी. लाइन्स पर लें आता है, जो एक सौ साल पुरानी सैनिक छावनी होती है, जिसका प्रमाण उन पूर्वसैनिकों के कागजात व श्रीमंत महाराजा साहब द्वारा भारत देश की आजादी पर बतौर इनाम में दिया हलफनामा से सिद्ध होती है! जबकी आर्टिकल 19 हि आम आदमी को बहुत से अधिकार देता है, अपने अधिकारों को पाने में! जबकी एम.ओ.जी.लाइन्स सैनिकों के पास असंख्य प्रमाण मौजूद है अपनी हस्थी दिखाने को! किंतु इंदौर नगर निगम आय एम सी भ्रष्टाचार का चश्मा लगाए इन प्रमाणों को देख कर भी अंदेखा कर रहा है!
आज जीस परिवार के बेटे का स्वर्गवास हुआ है, उसने सबसे पहले आय.एम.सी. का आक्रमक दंश झेला, प्रहार भी ऐसा की जिसमें एक नहीं दो विकलांग बालकों के साथ दोनों वृद्ध जोड़ा अपने आशियाने के साथ धराशायी हो गया! 24 घंटे मात्र मोहलत पर अपने लाचार परिवार को सुरक्षित स्थान पर न लेजा सके, निगम कर्मियों द्वारा सामान को अस्तव्यस्त कर लाखों के जेवरात नगदी को नुकसान पहुँचा कर परिवार के मुखिया के साथ मारपिट कर चलती सड़क पर बैठा दिया, जब शिकायत लेकर परिजन रहवासी थाने गए तो छत्रिपुरा पुलिस ने मात्र खानापूर्ति कर आवेदनिक कार्यवाही कर औपचारिकता पूरी कर पल्ला झाड़ लिया! दो तीन दिन खुल्ले सड़को पर रह कर हार थक के निगम द्वारा बनाए गए निवासी परिक्षेत्र में अपना आशियाना बनाया! किंतु इस मुख्य रहवासी क्षेत्र से दूर मिलो से बिना आवागमन की सुविधा के अभाव में सुदूर क्षेत्र से आनाजाना दुसवार होगया, धार्मिक पर्वती से ओतप्रोत जोड़ा अपने गुरूद्वारे से भी छटी हो गया! लाचार विकलांग बालक तो एम.ओ.जी. लाइन्स निवास से निकलते ही बेसुध निढाल हो गए थे, जिसका परिणाम यह निकला की मात्र कुछ दिनों के दरमियाँ ही एक वीर को मौत ने अपने आगोश में लेलिया! शायद एम.ओ.जी. लाइन्स की वादियों से जुदाई बर्दाश न कर सके, प्रकृति में घुलमिल हो पुनः इस ओर एम.ओ.जी. लाइन्स की ओर ही रुख कर लिया! कल 28/04/2025 को अंतिमयात्रा 12 बजे तक रीजनल पार्क पहुंचेगी!