एमओजी लाइन रहवासियों को हाइकोर्ट से अंतरिम राहत, आई एम सी स्मार्टसिटी को कड़े निर्देश की सम्बन्धित भूमि पर किसी भी प्रकार का कार्य न करें.

एमओजी लाइन रहवासियों को हाइकोर्ट से अंतरिम राहत, आई एम सी स्मार्टसिटी को कड़े निर्देश की सम्बन्धित भूमि पर किसी भी प्रकार का कार्य न करें.

इंदौर: स्मार्ट सिटी के प्रस्तावित प्रोजेक्ट पर फिलहाल विवादित हिस्से पर स्टे कर दिया है। विदित है कि एम ओ जी लाइंस सैनिक क्वार्टर के रहवासियों के द्वारा प्रस्तुत प्रथम अपील में याचिकाकर्ता गण द्वारा प्रस्तुत स्टे आवेदन पर दिनांक 30 अप्रैल को सुनवाई की जिसमें इंदौर स्मार्ट सिटी के अधिवक्ता ने आवेदन का जवाब देने हेतु समय की मांग की जिस पर मध्यप्रदेश हाइकोर्ट की इंदौर बेंच की एकल पीठ में जस्टिस प्रणय वर्मा ने इंदौर स्मार्ट सिटी को जवाब देने हेतु 3 दिन का समय दिया जिस पर रहवासियों के अधिवक्ता ने आगामी दिनांक तक पूर्व के स्टे आदेश को आगामी दिनांक तक यथावत रखने का निवेदन किया, जिस पर न्यायालय द्वारा आगामी दिनांक तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश किया एवं प्रकरण को आगामी सप्ताह में 7 मई को सुनवाई हेतु नियत किया है। 

गौरतलब है कि दैनिक विस्तार समाचार ने इस मूद्दे को प्रमुखता से उठाया है और इस मामले में एमओजी लाइन के रहवासियों ने भी 'दैनिक विस्तार समाचार' के प्रयासों की सराहना की है। स्मार्ट सिटी बसाने के नाम पर निष्ठुर इंदौर सिटी डेह्वलप एजेंसी को लेकर एमओजी लाइन के रहवासी में जबरदस्त गुस्सा है। उनका कहना है की सर्वप्रथम तो यह एक ऐतिहासिक सैनिक छावनी है, जो विगत सौ वर्षो से आज़ तक नियत स्थान पर काबिज़ है, दूसरा की इस क्षेत्र को रहवासियों ने प्रकृति का आयना बना रखा है, चारों ओर नाना प्रकार के पेड़ लगे पौधे लगे हुए, बारह माह विविध लताएं फूल, फल यंहा लग शुशोभित हुआ करते है, जिसमे आम, जाम, रामफल, जामन, जामुन, गुलर, निम्बू, शहतूत, नीम, आवला, मिट्ठीनीम, अशोक के अलावा विशाल नीम, पीपल, बरगद, शीशम, बिलपत्र, आदि वृक्ष बहुतायत में जिससे यहां हवा के निर्मल झोंके सदा बहा करते है, इसे इस पुरे क्षेत्र व आसपास कोसों दूर का ऑक्सीजन भंडार कहना अतिश्योक्ति न होंगी। प्रश्न उठता है कि क्या विकास के नाम पर हरे-भरे पेड़-पौधों की कुर्बानी के अलावा क्या इसका कोई विकल्प नहीं हो सकता? 
गत बीते वर्ष वर्षाऋतू में ही हमारे इंदौर में रेकार्ड वृक्षारोपण हुआ था, उन 51 लाख पौधों की स्थिति का आकलन आप स्वयं कर सकतें है, कि क्या परिस्थिति है, जो कुछ प्रतिशत बचना चाहिए वह भी बड़ी मशक्कत के बाद भी बचाए नहीं बच रहे, इस साल भी इंदौर में पुनः वनविभाग को गंगा संवर्धन अभियान के तहत 25 लाख पौधे लगाने का निर्देश हुआ है, करीब 25 लाख पौधे वनविभाग के सामने लगाने का लक्ष्य है और उनका संरक्षण सुनिश्चित करने कि जिम्मेदारी भी उन्ही के उप्पर है, जबकि हालही में चौराल में लगे मात्र 2500 पौधों कि रक्षा विभाग न कर सका। अब देखना यह है कि विभाग कितने समय में 25 राख पौधों के लिए जमीन का बंदोबस्त कर पाता है। उल्लेखनीय है की शहर हरियाली को बढ़ावा देने के लिए समय समय पर प्रतिवर्ष कार्यक्रम आयोजि हुआ करते है जिनमें सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ आम नागरिकों भागीदारी भी होती है, किन्तु धरातल पर कितने जाग्रत होते है यह आप ओर हम सभी जानते है। आज़ तापमान की सामान्य डिग्री के पैमाने से हर कोई भोचक्का है, मानसून विभाग की चेतावनी से  सभी को भयभीत करें हुए है! अर्थात एम.ओ.जी. लाइन्स के सैनिकों के निवासों के साथ साथ वंहा की प्रकृति भी कई मायनो में अपनी महत्वपूर्ण पहचान योगदान बनाए रखती है!

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