पुरे देश की नज़र आज़ भारतीय सैनिकों पर, दूसरी ओर आखिर क्यूँ हो रहे सैनिक नज़रअंदाज.

पुरे देश की नज़र आज़ भारतीय सैनिकों पर, दूसरी ओर आखिर क्यूँ हो रहे सैनिक नज़रअंदाज.

इंदौर : सैनिक शब्द अपने आप में प्रगड़ सम्मान से सुशोभित होता, उसे यह सम्मान त्याग, समर्पण व भारत भूमि के प्रति अपना सर्वस्व निछाँवर करने पर मिलता है! आज जो देश के सामने बाहरी ताकत सीना उठाए खड़ी है, उस स्थिति का मुँह तोड़ जवाब देने के लिए हमारे भारतीय सैनिक भी तत्पर तत्काल तैयार है! बिना किसी नानूकुर के देश के हाईअलर्ट पर अपनी सेवा पर डट खड़े हुए है, सभी सैनिकों की छुट्टी रद्द होगई है, अपने सगे सम्बंधियों मित्रों को छोड़ भारतमाता की आन बान शान के लिए सीमा पर अपने लशकरों में तैनाद हो गए है, देश की रक्षा के लिए अपनी सुरक्षा को भी ताक पर रख जंगे मैदान पर पहुंच गए है! 
क्या उन्हें गोला बारूद, हथियारों की घनघनाहट से भय नहीं लगता, क्या उन्हें आग उगलते शोला बिखारतें शुलों से तीखे प्रहार में भी अपना जीवन नियीत दीखता!
किन्तु आज महानगर इंदौर में आय.एम.सी. स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट अपने स्वयं हित को ध्यान में रख कर राजनैतिक पोषित भुमाफियाओं को साथ ले ऐतिहासिक सैनिकों की भूमि पर कब्ज़ा ज़माने की मंशा लिए कार्य कर रहा, वह यह अधिकार भू - राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 को ध्यान में रख कर कर रहा किन्तु वह यह नहीं देख रहा की भू - राजस्व 1959 की धारा 248 (1) में साफ तोर पर लिखा गया है की मध्यभारत शासन में निर्मित आजादी के पूर्व बने निर्माणों पर उनका अधिकार न होगा, कब्ज़ा धारी ही उस भूमि का स्वतः ही मालिक होगा! जबकि एम ओ जी लाइन्स निर्मित भवन 1926 से ह्यात में जो 1947 की देश की आजादी के बाद इनामी तोर पर नामे हो गए, जिसे पूर्व सैनिकों द्वारा अपने पारिश्रमिक की कुछ अंश किश्तों को रकम चुकाकर हासिल किया गया!
आप एम.ओ.जी. लाइन्स के सैनिकों का इतिहास देखेंगे तो पाएंगे की तत्कालीन सरकार के माध्यम से यंहा निवासरत 24 सैनिकों ने द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया था, जिसमे से कई वीरगति को भी प्राप्त हुए, इसके बाद 1962 भारत चीन युद्ध व 1965 एवं 1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में भी यंहा निवासरत भारतीय सेना के सैनिकों ने भाग लिया था, यह सैनिक उन्ही की संतान है जो पूर्व में राजकीय सेना में शामिल थे! अर्थात इस पावन भूमि पर बसें सैनिक परिवारों को पूरा हक है कि वह इस भूमि पर रह कर इस भूमि कि रक्षा कर अपने पूर्वज सैनिकों का सम्मान करें!

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